Thursday, November 26, 2015

डा. हरि सिंह गौर की जन्म जयन्ति

वाराणसी में मनाई गयी डा. हरि सिंह गौर की जन्म जयन्ति

26 नबम्बर 2015 को सागर विश्व विद्यालय के संस्थापक डा. हरि सिंह गौर की जन्म जयन्ति वाराणसी में मनाई गयी। सागर वि.वि. के पुरातन छात्रों (जो कि वर्तमान में काशी हिंदू वि.वि. के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं) ने डा. गौर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया। सागर वि.वि. मे बिताये अपने पुराने दिन याद किये तथा डा. गौर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. कमलेश कुमार जैन ने की। मुख्य अतिथि डा. हेमंत मालवीय थे। विशिष्ट अतिथि डा. सुशांत श्रीवास्तव तथा डा. नवल किशोर मिश्र जी थे। कार्यक्रम का संयोजन डा. संजीव सर्राफ ने तथा संचालन डा. विवेकानंद जैन ने किया।

गौर साहब की जीवनी पर आधारित पुस्तक: सेवन लाइव्ज आटोबायोग्राफीके राजेश श्रीवास्तव द्वारा अनुवादित संस्करण की भी चर्चा हुई। डा. गौर के प्रेरणादायी व्यक्तित्व को जानने के लिये यह पुस्तक सभी को पढ़ना चाहिये। यह विश्वविद्यालय प्रकाशन सागर से प्रकाशित है।


इस अवसर पर डा. नीरज खरे, डा. ए.पी.सिंह, डा. मुकेश मालवीय, डा. पटनायक, सुरेंद्र जैन आदि ने विचार व्यक्त किये तथा विनयांजली दी। श्री राम कुमार दांगी जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर श्रीमती प्रीति जैन, रानी जैन, नीशू मिश्र, अक्षिता, हर्षिता, राजश्री, हर्षित, अनुकृति आदि उपस्थित रहे। 

Friday, November 20, 2015

जिन खोजा तिन पाइयां : कबीर तथा रहीम के दोहे आधुनिक सूचना तकनीकि तथा इंटरनेट पर खोज के संदर्भ में

आज इण्टरनेट का प्रयोग दैनिक जीवन में नित प्रति वढ़ता ही जा रहा है। किसी भी जानकारी की प्राप्ति के लिये इण्टरनेट पर सर्च इंजिन (Search Engine) के द्वारा खोजते हैं। आज गूगल (Google), याहू (Yahoo) बिंग (Bing), आस्क (Ask) आदि का नाम सभी को याद है। इण्टरनेट से जानकारी निकालने में सामान्य सर्च इंजिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं बहीं विशिष्ट जानकारी के लिये उस विषय से सम्बंधित सर्च इंजिन भी होते हैं जिन से आवश्यकतानुसार सूचना प्राप्त की जा सकती है।
सामान्य सर्च इंजिन से सूचना खोजने पर बहुत ज्यादा परिणाम (hits/ output) प्राप्त होते हैं इन में से सही जानकारी युक्त हाइपरलिंक को खोज पाना साधारण व्यक्ति के लिये कठिन तथा समय नष्ट करने के समान होता है। फिर भी इण्टनेट पर अनेक सूचना - संदर्भ स्रोत हैं जो कि सामान्य व्यक्ति की सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक बनते हैं।
कबीर का दोहा:-
जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ,  मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ
इस दोहे के माध्यम से यह बात कही गयी है कि प्रयास करने से ही सफलता मिलती है। आज छात्रगण इण्टरनेट का प्रयोग अपनी शिक्षा, तकनीकि प्रशिक्षण के साथ नयी जानकारियों की प्राप्ति के लिये कर रहे हैं। इण्टरनेट से जानकारी निकालने में सर्च इंजिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इण्टरनेट पर खोजते समय  कई बार  नयी उपयोगी जानकारियां भी मिल जाती हैं क्योंकि इण्टरनेट पर सूचना का विशाल भण्डार है अत: जब भी कोई नयी जानकारी या उपयोगी वेवसाइट मिले उसे अवश्य नोट कर लें तथा अन्य साथियों को भी बतायें क्योंकि विचार/ सूचना/ ज्ञान (Idea/ Information/ knowledge) बांटने से वढ़ता है।
हारवर्ड बिजिनेस रिव्यू (Dec. 2013 p.59) में लिखा है कि गूगल, अमेजन तथा अन्य आज हमें आगे बढ़ते हुये दिखायी दे रहे हैं इस के पीछे का कारण यह नहीं है कि बह लोगों को वास्तविक सूचना दे रहे हैं बल्कि निर्णय लेने हेतु संक्षिप्त जानकारी दे रहे हैं 
Google, Amazon and others have prospered not by giving customers Information, but by giving them shortcuts to decisions and actions. (Ref. : HBR Dec. 2013 p.59)
मेरे विचार से सूक्ष्म एवं संक्षिप्त जानकारी के लिये इंटरनेट सर्च इंजिन आधारित संक्षिप्त सूचना उपयोगी हो सकती है, लेकिन विस्त्रित जानकारी हेतु व्यक्तिगत रूप से पुस्तकालय जाकर गहन अध्ययन जरूरी है।
गूगल भी प्रोफेसनल लाइब्रेरियन पर विश्वास करता है, एक संदर्भ में कहा गया है कि जब हम आपकी सूचना आवश्यकता को पूरा न कर पायें तब आप पुस्तकालय जाकर लाइब्रेरियन से मिलकर खोजने की नयी बिधियों की जानकारी प्राप्त करें।
हेरत हेरत हे सखी, रहया कबीरा हिराई।
बून्द समाना समन्द में, सो कत हेर्या जाई।
सूचना का भण्डार अथाह एवं विस्त्रित है और उसमें से खोजना एक कला है। सूचना प्राप्ति के लिये अनेक तरह से प्रयास करना पड़ते हैं। कई बार सही कीवर्ड नहीं होने से घण्टों का समय बर्बाद चला जाता है और उपयोगी सूचना नहीं मिल पाती। अत: उचित कीवर्ड, सही सर्च ईंजिन, सही सर्च तकनीकि के प्रयोग से ही सफलता मिलती है। अत: सूचना विज्ञान के विशेषज्ञों के सहयोग से सही जानकारी लेना चाहिये।

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥

सूचना सामग्री उपयोग के लिये है। पुस्तकों का लेखन कार्य तथा पुस्तकालयों का निर्माण भी नागरिकों के हित के लिये किया जाता है। पुस्तकालय पाठकों के लिये बनाये जाते हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष भी पुस्तकों का चयन पाठकों की सूचना की पूर्ति के लिये ही करते हैं। अत: पुस्तकालय भी तरूवर के समान परोपकार के लिये हैं। ऑनलाइन डिजिटल लाईब्रेरीज पर हजारों की संख्या में ई-बुक्स मुफ्त में उपलब्ध हैं जिसका लाभ समाज का प्रत्येक व्यक्ति उठा सकता है। प्रमुख डिजिटल लाईब्रेरीज इस प्रकार हैं: डिजिटल लाईब्रेरी ऑफ इंडिया (www.dli.gov.in ); यूनीवर्सल डिजिटल लाईब्रेरी (www.udl.org); वर्ल्ड डिजिटल लाईब्रेरी (www.wdl.org) ; प्रोजेक्ट गुटनवर्ग (www.gutenberg.org) आदि।

इन ऑनलाइन डिजिटल लाईब्रेरीज के माध्यम से पाठकगण आपनी प्रसंद की पुस्तक चुनकर डाउनलोड कर सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुरूप समय निकालकर पढ़ सकते हैं। डिजिटल लाईब्रेरीज पर मुख्य रूप से बह पुस्तकें उपलब्ध हैं जो कि कॉपीराइट के समय के प्रावधान से परे हैं। इन वेवसाइट के माध्यम से बहुत ही प्राचीन उपयोगी पुस्तकें पाठकों को आसानी से मिल जा रही हैं। इसका सूचना की उपलब्धता तथा डिजिटल डिवाइड को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान है।

निष्कर्ष: 

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान का क्षेत्र बहुत ही आनंद दायक है। यहां सूचना देने बाले को भी नयी नयी जानकारियां हमेशा मिलती रहती हैं बह स्वयं भी अपडेट होता रहता है और सामने बाले व्यक्ति को भी सूचना सेवा द्वारा संतुष्टि एवं खुशी प्रदान करता है। अंत में मैं कहना चाहूंगा कि संत कबीर तथा रहीम के इन कालजयी दोहों में अपार ज्ञान छिपा है। यह दोहे आधुनिक सूचना तकनीकि के युग में भी इण्टरनेट से सूचना पुन:प्राप्ति में मार्गदर्शन प्रदान करने बाले हैं।